तन्हा हैं सफ़र ज़िंदगी का
11:03 PM Edit This 0 Comments »
अब साथ भी उनका रहे या न रहे
चलना है मुझे वो चले या न चले
पूछो अभी उससे बहारों का पता
यूँ रू-ब-रू फिर वो रहे या न रहे
तुम आज जी भर के सीसकने दो मुझे
कल क्या पता ये ग़म रहे या न रहे
हम तो कहेंगे जो भी कहना हैं हम
उसकी है मरज़ी वो सुने या न सुने
मुझे मेरी बस राह आ जाए नज़र
ये रात चाहे फिर ढले या न ढले
है ज़िंदगी का अर्थ ही चलना
राह मिल गई मंज़िल मिले या न मिले
चलना है मुझे वो चले या न चले
पूछो अभी उससे बहारों का पता
यूँ रू-ब-रू फिर वो रहे या न रहे
तुम आज जी भर के सीसकने दो मुझे
कल क्या पता ये ग़म रहे या न रहे
हम तो कहेंगे जो भी कहना हैं हम
उसकी है मरज़ी वो सुने या न सुने
मुझे मेरी बस राह आ जाए नज़र
ये रात चाहे फिर ढले या न ढले
है ज़िंदगी का अर्थ ही चलना
राह मिल गई मंज़िल मिले या न मिले

0 comments:
Post a Comment