आज अचानक...
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आज, ऐसा लगा जैसे
वक्त वहीं लौट आया हो...
उन्ही दिनों की तरह
आज भी दरवाज़ा खुला...
तू लाल लिबास में लिपटी
मुस्कुराकर मेरा चेहरा देखती है...
मेरे साथ कई लोग तेरी मुस्कान पर..
शक भरी नज़रे डालते है,
मेरी तरह वो भी शायद,
तेरे माथे पर लगे...
ब्रह्माण्ड में अटक जाते है!!
मैं मिलता हूं गले तुझसे
और दिल मेरा रो देता है
पता नहीं क्या होता था तब,
जब कोई भी गम होता था
तुझसे लिपटकर
सब भूल जाता था...
याद आता है तेरा,
प्यार से हाथ थामना,
वो गले लगाना,
जल्दी जल्दी में आना,
और फिर वक्त की रेत सा,
मेरे हाथों से निकल जाना..
वो दरवाज़ा अचानक आज भी
खुला है..
तेरी यादों का चेहरा लिए...
मैं तुझे देखता हुआ
दूर तक निकल गया...
तेरी आँचल की महक,
समा गई है जैसे फिज़ाओ में आज
किसकी मुस्कान में तलाशु तुझे आज
किसका हाथ थाम कर आज चलू
किसके हाथों में होगा तेरा वो स्पर्श
कहा होगी मेरी मंजिल....
शायद..............
वक्त वहीं लौट आया हो...
उन्ही दिनों की तरह
आज भी दरवाज़ा खुला...
तू लाल लिबास में लिपटी
मुस्कुराकर मेरा चेहरा देखती है...
मेरे साथ कई लोग तेरी मुस्कान पर..
शक भरी नज़रे डालते है,
मेरी तरह वो भी शायद,
तेरे माथे पर लगे...
ब्रह्माण्ड में अटक जाते है!!
मैं मिलता हूं गले तुझसे
और दिल मेरा रो देता है
पता नहीं क्या होता था तब,
जब कोई भी गम होता था
तुझसे लिपटकर
सब भूल जाता था...
याद आता है तेरा,
प्यार से हाथ थामना,
वो गले लगाना,
जल्दी जल्दी में आना,
और फिर वक्त की रेत सा,
मेरे हाथों से निकल जाना..
वो दरवाज़ा अचानक आज भी
खुला है..
तेरी यादों का चेहरा लिए...
मैं तुझे देखता हुआ
दूर तक निकल गया...
तेरी आँचल की महक,
समा गई है जैसे फिज़ाओ में आज
किसकी मुस्कान में तलाशु तुझे आज
किसका हाथ थाम कर आज चलू
किसके हाथों में होगा तेरा वो स्पर्श
कहा होगी मेरी मंजिल....
शायद..............

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